लक्ष्मणानंद जी महाराज ने धर्म अस्मिता का भाव जगाया:पंवार
विहिप ने मनाया बलिदान दिवस
बैतूल। विश्व हिन्दू परिष धर्म प्रसार विभाग द्वारा स्वामी लक्ष्मणानंद जी महाराज का बलिदान दिवस विवेकानंद वार्ड में मनाया। इस मौके प्रांत सहधर्म प्रसार प्रमुख भूपेन्द्र पंवार ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद जी महाराज बचपन से ही दुखी-पीडि़तों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर देने का संकल्प मन में पालते रहे। 1965 में वे गौरक्षा आंदोलन से जुड़े, वे सच्चे और पक्के गौमाता के भक्त थे। सन् 1970 से 2007 तक स्वामी जी पर 8 बार जानलेवा हमले किए गए। मगर इन हमलों के बावजूद स्वामी जी का प्रण अटूट था और वह प्रण यही था- धर्मांतरण रोकना है, धर्म अस्मिता जगानी है। प्रांत कार्यकारी सदस्य मनोहर लोखंडे ने कहा कि भारत की करोड़ों जनता स्वामी लक्ष्मणानंद के प्रति अनन्य श्रद्धा रखती है। सैकड़ों गांवों में पदयात्राएं करके उन्होने लाखों लोगों के जीवन में उन्होंने स्वाभिमान का भाव जगाया। सैकड़ों गांवों में उन्होंने श्रीमद्भागवत कथाओं का आयोजन किया। एक हजार से भी अधिक भागवत घर स्थापित किए, जिनमें श्रीमद्भागवत की प्रतिष्ठा की। 1986 में स्वामी जी ने जगन्नाथपुरी में विराजमान भगवान जगन्नाथ स्वामी के विग्रहों को एक विशाल रथ में स्थापित करके उड़ीसा में तीन मास तक भ्रमण कराया। इसी रथ के माध्यम से स्वामी जी ने नशाबन्दी, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एवं गोरक्षा के लिए जन जागरण किया। इससे लोगों में चेतना एवं धर्मनिष्ठा जागृत हुई। इस अवसर पर प्रांत सहधर्म प्रसार प्रमुख भूपेन्द्र पंवार, प्रांत कार्यकारी सदस्य मनोहर लोखंडे, नगर अध्यक्ष दयाराम माकोड़े, सत्संग प्रमुख जमनालाल मालवीय, विवेकानंद वार्ड अध्यक्ष कुसुमलाल पंवार आदि मातृशक्ति धर्म प्रसार विभाग प्रमुख मंजु उपासे, मातृशक्ति धर्म प्रसार विभाग जिला प्रमुख विमला मालवीय, नगर प्रमुख अंजनी बेले, जयाबाई पंवार आदि मौजूद थे। मंच संचालन दयाराम माकोड़े ने किया।




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