भारतीय संगीत अध्यात्म, सुकुन के साथ अब रोजगार भी:डॉ.पवन कालम्बे बैतूल। पाश्चात्य संगीत में शोर-शराबा है, जो तनाव देता है वहीं भारतीय संगीत में में ईश्वर है अध्यात्म, भक्ति, संस्कार, सुकुन आनंद धैर्य के साथ ही अब संगीत से रोजगार भी है। यह बात अनहद कला संगीत महाविद्यालय गंज में आयोजित संगीत कार्यशाला के दौरान अतिथि और मुंबई से पधारे शास्त्रीय गायक डॉ.पवन कालम्बे ने कही। कार्यशाला में डॉ.कलांबे ने बच्चों को संगीत के बारे में बारीकी से बातें बताई और संगीत की हर गायन शैली को गाकर बच्चों के सामने राखी। उन्होने शास्त्रीय गायन, भजन, ठुमरी, गीत को सूक्ष्म तरीके से समझाया। डॉ.कालम्बे ने कहा कि शास्त्रीय संगीत में पारांगत होने और डिग्री लेने के बाद इसमें रोजगार के भी अच्छे अवसर हैं। इस अवसर पर श्री अनहद कॉलेज के कलाकार शिक्षक विद्यार्थी अभिभावक एवं संचालक दिलीप रावत, जूही रावत, योगी खंडेलवाल, श्रद्धा खंडेलवाल,शंख जैसवल, सूर्यांश वर्मा भावेश माथनकर, कपिल घुमरे देवीदास खातरकर, विनोद परिहार, नरेंद्र नाथ पाटिल उपस्थित रहें।