संत रविदास महान दार्शनिक थे

बैतूल। गुरू पूर्णिमा के अवसर पर संत शिरोमणि रविदास मंदिर टिकारी में भीम आर्मी द्वारा गुरू महाराज के चरणों में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुएपुष्प अर्पित किए व गुरू वंदना की। इस मौके पर भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष सिद्धार्थ झरबड़े व जिला प्रभारी जितेन्द्र गोले ने कहा कि संत रविदास बचपन से ही परोपकारी और दयालु स्वभाव के थे। दूसरों की सहायता करना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। रविदास दार्शनिक थे और उनका मानना था कि मन जो काम करने के लिए अंत:करण से तैयार हो, वही काम करना उचित है। अगर मन सही है तो इसे कठौते के जल में ही गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त हो सकता है। माना जाता है कि इस प्रकार के उनके व्यवहार के बाद से ही यह कहावत प्रचलित हो गई कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। जिला सदस्य राजकुमार पंद्रे ने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी प्राशंगिक हैं। इस अवसर पर जिला सदस्य नीरज अंबुलकर, अरूण डोंगरे, येागेश वामनकर, संगठन मंत्री योगेश इंगले, महासचिव आकाश कापसे, जसवंत पंद्र, हुकुमलाल मोहबे, शंकर चौधरी, नंदकिशोर मंदरे, लीलाधर बडसाने, कमलकेशोर छिपने, तुलसा सावरकर, विनय मंडलेकर, सुरेश बर्थे, नारायण सावरकर,रामरतन तिलंते, ममता तिलंते, गायत्री बामने, मंजु छिपने, कुसुम मंदरे, रोशनी मंदरे, प्रकाश मोहबे, कालीचरण अहिरवार, गुड्डु टिटारिया, आशुतोष राजदमे, चन्द्रभान अहिरवार, एलडी बडख़ाने, शंकरसिंह चौधरी, विनय मंदरे, कालीचरण चौधरी मौजूद थे

Comments

Popular posts from this blog