स्कल्पचर के माध्यम से बच्चों ने बताया
हर पेन खत्म होने से पहले इतिहास लिख चुका होता है
बैतूल। आरडी पब्लिक स्कूल की परिधी विनोद पडलक, अक्षरा गौरीशंकर इन्हें व चेताली अनिल अंबुलकर ने अपने कला गुरू व युवा चित्रकार श्रेणिक जैनके मार्गदर्शन में हजारों खराब हो चुके पेनों का उपयोग करते हुए स्कल्पचर तैयार किया है व दीवार पर भी पेनों के पैटर्न से डिजाईन तैयार की है। शीतकालीन अवकाश का सद्उपयोग करते हुए छुट्टियों का लाभ लिया। श्रेणिक जैन ने बताया कि बच्चों ने यह स्कल्पचर नए वर्ष के स्वागत में तैयार किया गया है जिसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है। इसे पेन से इसलिए बनाया गया है क्योंकि हर खाली पेन अपनी स्याही से इतिहास लिख चुका होता है। बच्चों के अपने पेन का जितना उपयोग किया होगा वह उसके भविष्य निर्माण में उतनी ही भूमिका अदा करेगी। बच्चों के इस प्रयास की शाला प्रबंधन ने सराहना की है।
हर पेन खत्म होने से पहले इतिहास लिख चुका होता है
बैतूल। आरडी पब्लिक स्कूल की परिधी विनोद पडलक, अक्षरा गौरीशंकर इन्हें व चेताली अनिल अंबुलकर ने अपने कला गुरू व युवा चित्रकार श्रेणिक जैनके मार्गदर्शन में हजारों खराब हो चुके पेनों का उपयोग करते हुए स्कल्पचर तैयार किया है व दीवार पर भी पेनों के पैटर्न से डिजाईन तैयार की है। शीतकालीन अवकाश का सद्उपयोग करते हुए छुट्टियों का लाभ लिया। श्रेणिक जैन ने बताया कि बच्चों ने यह स्कल्पचर नए वर्ष के स्वागत में तैयार किया गया है जिसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है। इसे पेन से इसलिए बनाया गया है क्योंकि हर खाली पेन अपनी स्याही से इतिहास लिख चुका होता है। बच्चों के अपने पेन का जितना उपयोग किया होगा वह उसके भविष्य निर्माण में उतनी ही भूमिका अदा करेगी। बच्चों के इस प्रयास की शाला प्रबंधन ने सराहना की है।


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