सभी विद्याओं की देवी की उपासना का पर्व बसंत पंचमी
हिन्दू वाहिनी ने मनाई बसंत पंचमी
बैतूल। विशाल हिन्दु वाहिनी संगठन द्वारा ज्ञान दीप पब्लिक स्कूल में बच्चों के साथ वसंत पंचमी
मनाई। संगठन की महिलाओं ने मां सरस्वती की पूजा वंदना करके बच्चों को ज्ञान और अपने व्यवहार के विषय पर बातचीत की और इस त्यौहार के महत्व से अवगत कराया। इस मौके पर कल्पना तरूडकर ने कहा कि वसंत ऋ तु के आगमन की खुशी के बीच मनाया जाता है वसंत पंचमी पर्व। इस पर्व को विद्या की देवी सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है और शिक्षाविद् और छात्र मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान बनाने की प्रार्थना करते हैं। हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार आज ही के दिन ही ब्रह्माण्ड के रचयिता ब्रह्माजी ने सरस्वती की रचना की थी। शीतल खंडेलवाल और माधुरी मांडलेकर ने कहा कि देवी भागवत में उल्लेख मिलता है कि माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही संगीत, काव्य, कला, शिल्प, रस, छंद, शब्द शक्ति जिह्वा को प्राप्त हुई थी। वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने, हल्दी से सरस्वती की पूजा और हल्दी का ही तिलक लगाने का भी विधान है। पीला रंग इस बात का द्योतक है कि फसलें पकने वाली हैं इसके अलावा पीला रंग समृद्धि का सूचक भी कहा गया है। इस पर्व को ऋ षि पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। कार्यक्रम का संचालन अनीता तरूडकर और आभार तन्वी पांडा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर शाला प्रबंधन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
हिन्दू वाहिनी ने मनाई बसंत पंचमी
बैतूल। विशाल हिन्दु वाहिनी संगठन द्वारा ज्ञान दीप पब्लिक स्कूल में बच्चों के साथ वसंत पंचमी
मनाई। संगठन की महिलाओं ने मां सरस्वती की पूजा वंदना करके बच्चों को ज्ञान और अपने व्यवहार के विषय पर बातचीत की और इस त्यौहार के महत्व से अवगत कराया। इस मौके पर कल्पना तरूडकर ने कहा कि वसंत ऋ तु के आगमन की खुशी के बीच मनाया जाता है वसंत पंचमी पर्व। इस पर्व को विद्या की देवी सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है और शिक्षाविद् और छात्र मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान बनाने की प्रार्थना करते हैं। हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार आज ही के दिन ही ब्रह्माण्ड के रचयिता ब्रह्माजी ने सरस्वती की रचना की थी। शीतल खंडेलवाल और माधुरी मांडलेकर ने कहा कि देवी भागवत में उल्लेख मिलता है कि माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही संगीत, काव्य, कला, शिल्प, रस, छंद, शब्द शक्ति जिह्वा को प्राप्त हुई थी। वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने, हल्दी से सरस्वती की पूजा और हल्दी का ही तिलक लगाने का भी विधान है। पीला रंग इस बात का द्योतक है कि फसलें पकने वाली हैं इसके अलावा पीला रंग समृद्धि का सूचक भी कहा गया है। इस पर्व को ऋ षि पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। कार्यक्रम का संचालन अनीता तरूडकर और आभार तन्वी पांडा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर शाला प्रबंधन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।



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