जन औषधि के अग्रदूत किताब केन्द्रीय मंत्री को की भेंट

प्रधानमंत्री जन औषधि महत्कांक्षी और जनकल्याणकारी:केन्द्रीय मंत्री


बैतूल। प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र मस्जिद कॉम्प्लेक्स, यूनियन बैंक के सामने गंज के संचालक अफ्फान नूरानी ने केन्द्रीय मंत्री व सांसद डीडी उइके को डॉ.मनसुख मांडविया द्वारा लिखी गई किताब जन औषधि के अग्रदूत भेंट की। इस मौके पर डीडी उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा है कि दवा की कमी से किसी गरीब की मौत नहीं होनी चाहिए इसी उद्देश्य को लेकर प्रधानमंत्री ने यह योजना शुरू की थी जो आज सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है। प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र में दवाइयों का मूल्य इतना कम है कि कोई भी गरीब इस खर्च को वहन कर सकता है। डीडी उइके ने कहा कि यह सर्वविदित है कि यह दवाइयां उच्च गुणवत्तापूर्ण है व वल्र्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन और जीएमपी द्वारा प्रमाणित हैं। जिसकी गुणवत्ता की अंतिम जांच एनएबीएल लैब से की जाती  है। सांसद प्रतिनिधि विकास मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र की दवाइयां बेहद सस्ती और गुणवत्तापूर्ण हैं और बाजार में बिकने वाली दवाइयों की तुलना में 90 प्रतिशत तक की बचत की जा सकती है। संचालक ने बताया कि केन्द्र में मिलने वाली दवा कितनी सस्ती है इसका एक उदाहरण से समझा जा सकता है कि सेनेटरी पैड केन्द्र पर 1 रूपए का 1 उपलब्ध होता है। क्षेत्रवासियों से इस केन्द्र को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इसकी उपयोगिता इसी बात से समझी जा सकती है कि यह केन्द्र मॉरीशस में भी प्रारंभ हो गया है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि इस सस्ते विकल्प की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही थी। 

किताब में है अद्भुत जानकारी 

जन औषधि के अग्रदूत पुस्तक में उल्लेख है कि नरेंद्र मोदी ने गरीबों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना को लगातार आगे बढ़ाया। जन औषधि के अग्रदूत के तौर पर श्री मोदी ने जनऔषधि केंद्रों की संख्या को 2014 के 99 केंद्रों के मुकाबले बढ़ाते हुए तकरीबन 11000 से अधिक जन औषधि केंद्रों तक पहुंच दिया है। श्री मोदी ने गरीबों की सेवा कर रहे इन केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर 25000 करने का लक्ष्य रखा है जिससे देश के जन—जन तक सस्ती और उच्च गुणवत्ता की दवाएं पहुंच सकें। नरेंद्र मोदी के तकरीबन दस वर्षों के कार्यकाल में जन औषधि योजना कैसे जमीनी स्तर पर जन—जन की सेवा करती हुई रोजगार का माध्यम बनी है और कैसे यह एक मौन क्रांति बनकर दीर्घकालिक बदलावों का माध्यम बन रही है इसकी विस्तृत कहानी इस पुस्तक के जरिए बयां की गई है।

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