भव्य भंडारे के साथ अखंड रामायण संपन्न
महान संतों के विचार समाज की भलाई के लिए प्रेरित करते हैंबैतूल। नहिं दरिद्र सम दुख जग माहीं। संत मिलन सम सुख जग नाहीं॥ पर उपकार बचन मन काया। संत सहज सुभाउ खगराया॥ याने जगत में दरिद्रता यानी गरीबी के समान कोई दुख नहीं है तथा संतों के मिलने के समान जगत में कोई सुख नहीं है। क्योंकि मन, वचन और शरीर से परोपकार करना ही संतों का सहज स्वभाव है। महान संत आपको अच्छे विचार देते हैं, जिससे आप समाज की भलाई के लिए काम करते हैं। समाजसेवी एवं वरिष्ट पत्रकार अरविंद मालवीय के निवास खंजनपर में पंडित श्रीराम शुक्ला के द्वारा पूजन अर्चना के साथ अखंड रामायण का पाठ विशाल भंडारे के साथ संपन्न हुआ। इस मौके पर अरविंद मालवीय ने बताया कि इस पवित्र ग्रंथ का पाठ मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। जिसमें इस ग्रंथ ने हमें निरंतर आगे बढ़ते हुए विजय प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। इस पवित्र ग्रंथ की सभी चौपाई हमें हमारे कष्टों से मुक्ति दिलाती है। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रदीप मालवीय, संदीप मालवीय, श्रीमती प्रीति चौकसे, श्रीमती शानू, श्रीमती सरोज मालवीय, आराध्य चौकसे, आध्या चौकसे का सराहनीय योगदान रहा। बाबा दरबार अमोरी रामायण मंडल के सदस्यों विजय कुमार बावने, रामदास बेले, श्रीमती ताईजी, सुधाकर धोटे, सावन राने, शिवकुमार, नारायण हरसुले, राजू बाथरी, अन्ना पंवार, राजेश खातरकर आदि श्रद्धालुओं ने संगीतमय अखंड रामायण पाठ किया गया। अरविंद मालवीय ने आभार व्यक्त किया। सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
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