हर्षोउल्लरास से मनाया सकारात्मक उर्जा और संपन्नता का उत्सव
बैतूल। महालक्ष्मी व्रत मां का आशीर्वाद पाने के लिए विधि अनुसार किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए व्रत, पूजा और उपाय बहुत जल्दी असर दिखाते हैं। महालक्ष्मी व्रत में घर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और तीन दिन तक विविध आयोजन होते हैं। साथ ही सुहाग की वस्तुएं भी अर्पित करते है। स्थापना वाला घर मायका कहलाता है। यही कारण है कि उनके आगमन पर विभिन्न प्रकरण के व्यंजन बनाकर खूब खातिरदारी की जाती है। प्रतिवर्षानुसार दीपक आम्बेकर के निवास गणेश वार्ड बैतूल में महालक्ष्मी विरजी गई। इस मौके पर श्रीमती अर्चना दीपक आम्बेकर ने बताया कि माता लक्ष्मी अपने परिवार के साथ हमारे घर में आएं। घरों में सुख-संपन्नता, सकारात्मक उर्जा और सदैव लक्ष्मी का वास हो, कुछ ऐसी ही मनोकामना के साथ महालक्ष्मी उत्सव का आयोजन करते हैं। यह परंपरा कई पी़ढिय़ों से चली आ रही है। श्रीमती आम्बेकर ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी के जिस रूप की पूजा की जाती है वो जेठानी-देवरानी हैं। अपने दो बच्चों के साथ वो इन दिनों मायके आती हैं। मायके में आने पर तीन दिनों तक उनका भव्य स्वागत किया जाता है। पहले दिन स्थापना, दूसरे दिन भोग और तीसरे दिन हल्दी कुमकुम के साथ माता की विदाई की जाती है। उपस्थित प्रीति दुबे और श्रीरंग आम्बेकर ने बताया कि कहा जाता है कि लक्ष्मी की इन मूर्तियों में कोई भी बदलाव तभी किया जा सकता है जब घर में कोई शादी हो या किसी बच्चे का जन्म हुआ हो। प्रीति-तृप्ती हाथवर्णे एवं दीपक आम्बेकर ने बताया कि माता की प्रतिमाओं के अंदर गेहूं और चावल भरे जाते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि घर धन-धान्य से भरा-पूरा रहे। समीर आम्बेकर और प्रथा दुबे ने बताया कि पूजन पश्चात सैंकड़ों लोगों ने दर्शनलाभ और प्रसादी ग्रहण की।

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