वेलेंटाईन सिर्फ मतिभम्र, मातृ पितृ पूजन दिवस मनाएंगे



बैतूल। शास्त्रों में वर्णित है कि जो माता-पिता और गुरुजनों का आदर करता है वह हमेशा सम्मान पाता है। माता-पिता के उपकारों का ऋण तो चुकाया ही नही जा सकता परन्तु उनकी सेवा कर अपना प्रेम तो व्यक्त किया ही जा सकता है। आज युवावर्ग पाश्चात्य संस्कृति के कुप्रभाव से इतना अधिक प्रभावित हैं कि वें माता पिता का आदर व सेवा करना भूल रहें हैं। ऐसे भटके हुए युवाओं को संत श्री आशारामजी बापू ने 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस की सुंदर सौगात देकर पतन की खाई में गिरने से बचाने का बीढ़ा उठाया। उन्ही की पहल पर विगत 15 वर्षों से देशभर की श्री योग वेदांत सेवा समितियों, युवा सेवा संघ,महिला उत्थान मंडल व आश्रमों द्वारा विद्यालयों व सार्वजनिक स्थलों में मातृ-पितृ पूजन दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। युवा सेवा संघ के जिलाध्यक्ष राजेश मदान ने बताया कि बैतूल जिले में भी समिति द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके है। आज भी संत श्री आशारामजी आश्रम चिखलार, सामुदायिक भवन सोनाघाटी सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों के अलावा घर-घर में मातृ-पितृ पूजन दिवस के कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन आयोजनों से प्रेरित होकर शहर के कुछ युवाओं नीलेश पंडागरे,भावेश सूर्यवंशी, प्रथमेश अनेराव, प्रखर आर्य आदि ने वेलेंटाइन डे को मतिभ्रमित करने का प्रतीक मानते हुए  कहा कि वे अब इस दिन को मातृ पितृ पूजन दिवस के रूप ही मनाएंगे। श्री मदान ने जिले के अन्य युवाओं से आग्रह किया है कि वे भी अपने अपने घरों में माता-पिता का पूजन करें और सोशल मीडिया में भी 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाएं जाने के साथ सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सहभागी बनें।

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