युवा अध्यात्म से दूर होकर अवसाद से घिर रहें हैं: संत राघवदास जी महाराज


बैतूल। जीव ईश्वर का स्वरूप होते हुए भी आज ईश्वर को पहचानने का प्रयत्न नहीं किया जा रहा है और इसी कारण उसे आंनद की प्राप्ति नहीं होती है। आज युवा अध्यात्म से दूर होते चले जा रहे और अवसाद, तनाव और अज्ञात भय जैसे मनोरोग का शिकार होकर कुंठित हो रहें हैं। वैज्ञानिक तथ्य भी है की अवसाद अनेक बीमारियों की जड़ है। भागवत कथा आनंद है, उत्सव है ईश्वर के दर्शन का माध्यम है। भागवत कथा ही ऐसा माध्यम है जिससे मस्तिष्क स्वस्थ्य और आनंदमय होता है। उक्त उद्गार सुभद्रा अस्पताल के पास, महावीर वार्ड में चल रही श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छटवें दिन संत राघवदास जी महाराज (अयोध्या) ने व्यक्त किए। उन्होने बताया कि मोक्षदायिनी भागवत कथा को जिसने भी सुना है सभी को मोक्ष प्राप्ति के योग बने हैं। चाहे वह मनुष्य तन हो अथवा कोई जीव जंतु, पशु पक्षी, इस कथा के श्रवण मात्र से सभी जीवात्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यजमान विजय सिंह चौहान व श्रीमती राजकुमारी चौहान ने बताया कि आज धर्मप्रेमी श्रोता बुधवार 16107 रानीपटरानी कथा, राजा नृग, सुदामा चरित्र, यदुकुल श्राप, भगवान का निज धाम गमन, परिक्षित मोक्ष, श्री सुकदेव गमन की कथा का श्रवण करेंगे। आयोजक डॉ.विनय सिंह चौहान व चंदन सिंह चौहान ने बताया कि कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 2 से 5 बजे तक किया जा रहा है। पहलवान सिंह चौहान ने सभी से उपस्थित होने का आग्रह किया है। 

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