मानवाधिकार मनुष्य के मूलभूत सार्वभौमिक अधिकार
अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस विचार संगोष्ठी संपन्न
बैतूल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय मानव अधिकार अपराध एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो की बैतूल शाखा ने सामूहिक रूप से ग्राम लाखापुर में गुरूवार मानवाधिकार दिवस पर मानव अधिकार क्या हैं, इनकी रक्षा के लिए व महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए क्या कानून हैं जैसे विषयों पर एक विचार संगोष्ठी लाखापुर के ग्रामवासियों के बीच संपन्न हुई। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पधारे मिथलेश डहरिया ने कहा कि मानवाधिकार दिवस मनाने का मकसद लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। मानवाधिकार में स्वास्थ्य, आर्थिक सामाजिक, और शिक्षा का अधिकार भी शामिल हैं। मानवाधिकार वे मूलभूत अधिकार हैं जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि के आधार पर प्रताडि़त नहीं किया जा सकता और उन्हें देने से वंचित नहीं किया जा सकता। ब्यूरो की राष्ट्रीय उपसचिव मीना खंडेलवाल ने बताया कि मानवाधिकार मनुष्य के वे मूलभूत सार्वभौमिक अधिकार हैं, जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि किसी भी दूसरे कारक के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता। कानूनी सलाहकार संजय शुक्ला ने कहा कि किसी भी मनुष्य की जिंदगी में आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार है ही मानवाधिकार है। भारतीय संविधान इस अधिकार की न सिर्फ ग्यारंटी देता है, बल्कि इसे तोडऩे वाले को अदालत सजा भी देती है। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष तूलिका पचौरी ने कहा कि इस साल मानवाधिकार दिवस की थीम है - फिर से बेहतर- मानव अधिकारों के लिए खड़े हो जाओ। यह थीम कोविड-19 महामारी से पैदा हुई स्थिति के मद्देनजर रखी गई है। प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष पचौरी, जिला प्रभारी (कोर कमेटी) कृष्णा पान्से, श्रीमती कल्पना तरूणकर, साजिद खान यशवंत धोटे, समर्थ तिवारी श्रीमती लता नागले एवं कमलेश गड़ेकर ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन जिला संयुक्त सचिव प्रबल वर्मा द्वारा व आभार जिला प्रभारी डॉ.चन्द्रकिशोर मानकर द्वारा आभार व्यक्त किया।

Comments
Post a Comment