बहुजन समाज विरोधी कानून वापस लो

राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन

बैतूल। राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ बहुजन क्रांति मोर्चा एवं उसके सहयोगी संगठनों ने बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क, बामसेफ वालेंटियर फोर्स, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद, राष्ट्रीय किसान मोर्चा एवं अन्य संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम के आव्हान पर जिला प्रशासन बैतूल को ज्ञापन सौंपा। इस संबंध में संघ के कार्यवाहक जिला संयोजक अरविंद भालाधरे ने बताया कि पुरानी पेंशन योजना शासन द्वारा खत्म की गई है जिसके कारण 2003 के बाद जो शासकीय कर्मचारी है उनका आर्थिक शैक्षणिक सामाजिक पारिवारिक शोषण हो रहा है जिसके कारण सभी कर्मचारी त्रस्त है, तथा भारतीय संविधान में निर्मित 29श्रम हितैषी कानूनों को रद्द कर 4 कानून बनाए गए हैं। जिसके कारण संगठित एवं असंगठित मजदूर कर्मचारी का भयानक शोषण हो रहा है। जिसमें काम के घंटे 8घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया है। उसी प्रकार किसानों की समस्या को लेकर के किसान विरोधी तीन बिल केंद्र सरकार द्वारा पारित किया गया है जो किसान विरोधी है। उल्लेखनीय है कि देश के 550 जिलों एवं 4000 तहसीलों तथा 55000 ब्लाकों में 26 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जिला एवं तहसील मुख्यालयों पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जा रहा है। इसके पूर्व दिनांक 19 अप्रैल से 23 अप्रैल तक देश भर में इन मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने काला फीता आंदोलन अपने कार्यालयों में धारा 144का अनुपालन करते हुए किया। बहुजन क्रांति मोर्चा के संभाग प्रभारी बीएल मासोदकर ने बताया नई शिक्षा नीति 2020 जो लागू की गई है उसकी विषमता से हमारे विद्यार्थी एवं उनकी पूरी शिक्षा का सत्यानाश होगा। बामसेफ के जिलाध्यक्ष आरएल इवने ने बताया कि निजीकरण लागू होने से बेरोजगारी चरम सीमा पर आ गई है। जिसके कारण देश भर में करोड़ों लोग बेरोजगार होकर भूखे मरने की कगार पर है। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के जिलाध्यक्ष दुर्गासिंह मर्सकोले ने बताया कि सरकार की बहुजन विरोधी नीतियों के कारण समस्त आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग के लोग भारी मुसीबत में है। बुद्धिष्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के जिला संयोजक सुभाष खातरकर ने बताया कि प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने से जो संचालक स्तरीय पद है वहां तक वंचित समाज के लोग कभी भी नहीं पहुंच पाएंगे। जो कि असंवैधानिक है। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के जिला संयोजक अंतूसिंह मर्सकोले ने बताया कि किसान विरोधी बिल को केंद्र सरकार द्वारा पारित करने से जमाखोरी पुंजीवादी सामंतवादी लोगों का बोलबाला रहेगा, गरीब मजदूर किसान भूखे मरने की कगार पर रहेंगे। ज्ञापन में शीघ्र इन कानूनों को निरस्त करने की मांग की गई है। 

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