नया अधिनियम लागु हुआ तो विक्रताओं के साथ होगा अन्याय
जिला खाद बीज दवा विक्रेता संघ ने सौंपा ज्ञापन 


बैतूल। जिला खाद बीज दवा विके्रता संघ बैतूल के तत्वावधान में  प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 में संशोधन के संबंध में बैतूल हरदा लोकसभा सांसद डीडी उइके को ज्ञापन सौंपा। इस संबंध में अध्यक्ष प्रकाश जैन ने बताया कि हमारे व्यवसाय पर पूरे भारत में  कीटनाशक अधिनियम 1968 और नियम 1971 के प्रावधान लागू होता है। परन्तु  केंद्र सरकार द्वारा आगामी संसद के सत्र में पेश किए जाने वाले कीटनाशक प्रबंधन बिल 2020 के बारे में संघ की कुछ आपत्तियां एवं सुझाव है। जिसमें नमूना अमानक होने पर इस धारा का उल्लंघन करने पर पूरे लाइसेंस को निलंबित, रद्द करने के बजाय कंपनी के सम्बंधित बैच नंबर को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और पूरे लाइसेंस को रद्द नहीं करना चाहिए।  
सचिव निलेश खंडेलवाल ने बताया कि किसी भी कीटनाशक के गलत या अमानक होने पर, व्यापारी, विक्रेता पर सजा, दंड का प्रावधान किया गया है, जो विक्रेताओं के प्रति अन्याय है। इस नियम को बदलते हुए विक्रेता शब्द को इन धाराओं से हटा दिया जाना चाहिए साथ ही यह प्रावधान भी किया जाना चाहिए कि किसान ने  वैज्ञानिक के निर्देशानुसार उस दवाई का उपयोग किया है या नहीं इस बारे में भी पूरी जानकारी ली जाए। मीडिया प्रभारी सलीम पटेल ने बताया कि बिल में मुआवजे का अधिकार प्रदान किया गया है कि कंपनी को कीटनाशक का काम न करने या इसके विपरीत करने पर मुआवजा दिया जाएगा। इसके कंपनी या निर्माता की जिम्मेदारी होनी चाहिए न कि वितरक या खुदरा विक्रेता की, इसलिए इस खंड से वितरक और खुदरा विक्रेता शब्द को हटाया जाना चाहिए। राजेन्द्र माहेश्वरी ने कहा कि लाइसेंस देने के प्रावधान की अवधि आवेदन प्राप्त होने के 3 महीने के भीतर लाइसेंस देने के लिए बनाई गई है, इसे घटाकर 1 महीने किया जाना चाहिए। ने कहा कि धर्मराज वराठे ने कहा कि  इस बिल में, अपीलीय अधिकारी को लाइसेंसिंग अधिकारी के निर्णय के खिलाफ अपील को हल करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है, जिसे घटाकर एक महीना किया जाना चाहिए। अनिल वर्मा ने बताया कि यदि कोई कीटनाशक अमानक (गैर-मानक) पाया जाता है,  और किसानों को कोई नुकसान नहीं होने पर उक्त बैच नम्बर पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और  संबंधित उपभोक्ता को उसी अनुपात से कीटनाशक दवा की कीमत के अंतर की राशि वापस करने का प्रावधान किया जाना चाहिए। प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोडऩे की आवश्यकता नहीं रखी जानी चाहिए। अंकेश गोठी ने बताया कि जिस प्रकार मेडिकल लायसेंस में एक बार लाइसेंस प्राप्त करने के बाद किसी भी कंपनी के किसी भी उत्पाद को बेचने के लिए  अनुमति होती है, ठीक उसी तरह कीटनाशक लाइसेंस में भी होना चाहिए।  हर साल लाइसेंस में मूल प्रमाण पत्र जोडऩे की आवश्यकता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए या राज्य स्तर पर कंपनी को ऑनलाइन देने के लिए प्रावधान किए जाने चाहिए। संघ के राम यादव ने बताया कि वर्तमान में बाजार में 200 से 300 किस्म के कीटनाशक उत्पाद उपलब्ध हैं। उनकी पेकिंग वार 10मिली, 30 मिली,60 मिली  100 मिलीलीटर, 250 मिलीलीटर, 500 मिलीलीटर, 1 लीटर और 5 लीटर) स्टॉक बनाए रखना संभव नही है। इसलिए डीलर के लिए स्टॉक रजिस्टर का प्रावधान समाप्त कर दिया जाना चाहिए या कंप्यूटर स्टॉक को मान्यता दी जानी चाहिए।  रवि बाजपेयी ने कहा कि  सभी कीटनाशक कंपनी द्वारा प्रत्येक पैकिंग पर अधिकतम विक्रय मूल्य अंकित किया जाता है।  इसलिए, डीलर द्वारा अपने प्रतिष्ठान में मूल्य सूची और स्टॉक बोर्ड के प्रावधान को समाप्त किया जाना चाहिए। वरूण पालीवाल ने कहा कि प्रत्येक दवाई पर काम करने का तरीका और काम करने की गारंटी देना होगी,  कीटनाशक निरीक्षक के काम में बाधा उत्पन्न करने में 25000 का जुर्माना, अमानक साबित होने पर  पांच लाख तक जुर्माना , किसानों को फोरम जाने का प्रावधान , बिना सीआइबी रजिस्ट्रेशन की दवाई बिक्री पर 5 से 10 लाख तक जुर्माना 5 साल तक की सजा । इस प्रकार के प्रावधान किए जाने पर देश में भ्रष्टाचार की एक नई गंगा बहने की सम्भावना है। इस सब प्रावधानों में से विक्रेता शब्द को हटाया जाना चाहिए क्योंकि कीटनाशक किसी भी विक्रेता के घर में तैयार नहीं किया जाता है और जो निर्माता कंपनी है उसके विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए प्रावधान किए जाने चाहिए। ज्ञापन में संगठन के सदस्यों की आपत्तियों और सुझावों को प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 में शामिल करने के लिए ससंद के पटल पर रखने की मांग की है। ज्ञापन सौंपते समय संघ के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे। 

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