ओझा डाना झोपड़पट्टी में शिक्षा व आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
नेशनल ह्यूमन राइट्स एंटी क्राइम एंड एंटी करप्शन ब्यूरो की ऐतिहासिक पहल
बैतूल। बैतूल बड़े-बड़े नेता, अधिकारी और सामाजिक संस्थाएं कदम रखने से भी कतराती हैं वहां ‘नेशनल ह्यूमन राइट्स एंटी क्राइम एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने ओझा डाना झोपड़पट्टी में शिक्षा व आत्मनिर्भरता का नया अध्याय की ऐतिहासिक पहल करते हुए शिक्षा और आत्मनिर्भरता की मशाल जलाई है। एनएचआरएसीएसीबी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहित गुप्ता के मार्गदर्शन में और ब्यूरो की राष्ट्रीय महिला सचिव श्रीमती मीना खंडेलवाल के नेतृत्व में विगत 10 वर्षों से ओझाढ़ाना झोपड़पट्टी में शिक्षा और सामाजिक उत्थान का कार्य किया जा रहा है। अब तक 80-100 बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ, ब्यूरो ने एक और नया कदम बढ़ाया है। जिन बच्चों ने सातवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी, उन्हें रोजगार-उन्मुख कार्यों के प्रति जागरूक कर करते हुए इन बच्चों को बढ़ईगीरी, बिजली का काम और अन्य तकनीकी कौशलों का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिलाने की योजना बनाई गई है। जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस अभियान को मूर्त रूप देने के लिए में मीना खंडेलवाल के साथ ब्यूरो की सक्रिय कार्यकर्ता रेखा गुजरे, ममता दहाके, हेमा सिंह चौहान और साजिद खान उपस्थित रहे। जिन्होंने झोपड़पट्टी में जाकर बच्चों और अभिभावकों से संवाद किया। इस कार्य में मनोहर धुर्वे का विशेष योगदान सराहनीय रहा है। वहीं आरडी स्कूल की शिक्षिका श्रीमती रितु खंडेलवाल ने बस की व्यवस्था कर बच्चों को श्री श्री ज्ञान मंदिर, हमलापुर स्कूल में दाखिला दिलाने में अहम सहयोग दिया। जब ब्यूरो ने एक कठिन और असंभव माने जाने वाले कार्य को संभव कर दिखाया। आज से पहले कभी इस झोपड़पट्टी का रुख तक नहीं करते थे। जहां सबने इस जगह से मोड़ लिया, वहो ब्यूरो ने डटकर काम किया। जो बच्चे शिक्षा और रोजगार की ओर बढ़ रहे हैं, वह मीना खंडेलवाल और उनकी टीम की वर्षों की मेहनत और ब्यूरो की दूरदृष्टि का प्रत्यक्ष परिणाम है। ब्यूरो द्वारा झोपड़पट्टी की महिलाओं को नि:शुल्क ब्यूटी पार्लर एवं पेपर बैग निर्माण प्रशिक्षण भी दिया गया है। जिससे कई महिलाएं अब आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का सहारा बनी हैं। कोरोना काल में भी ब्यूरो ने मानवता का परिचय देते हुए वहां के लोगों को एक माह तक राशन व समय-समय पर कपड़े वितरित कर उनकी सहायता किया गया। यह अभियान न केवल शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब सही नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा भाव से कार्य किया जाए, तो सबसे कठिन परिस्थितियाँ भी बदल जाती हैं। एनएचआरएसीएसीबी समाज को यह संदेश देता है कि यह कार्य किसी दिखावे या राजनीतिक लाभ का नहीं, बल्कि मानवता और भविष्य की पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए है।
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