विश्व महिला दिवस पर निर्दोष हिन्दू संत श्री आशारामजी बापू की रिहाई की उठी मांग
महिला उत्थान मंडल एवं श्री योग वेदांत सेवा समितिने सौंपा ज्ञापन
बैतूल। नारी तू नारायणी का संदेश देने वाले पूज्य संत श्री आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित श्री योग वेदांत सेवा समिति व महिला उत्थान मंडल बैतूल द्वारा विश्व महिला दिवस के अवसर पर मंगलवार को निर्दोष हिन्दू संत श्री आशारामजी बापू की शीघ्र ससम्मान रिहाई की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम अपर कलेक्टर श्यामेन्द्र जायसवाल को ज्ञापन सौंपा। सैंकड़ो महिलाओं ने हिन्दू संत श्री आशारामजी बापू के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ जमकर आवाज बुलंद करते हुए नारेबाजी की। इस मौके पर समिति के जिलाध्यक्ष राजेश मदान ने बताया कि जिस संत ने महिलाओं के उत्थान हेतु महिला उत्थान मंडल की स्थापना की व युवाओं के सर्वांगीण विकास हेतु युवा सेवा संघ का गठन कराया जिनकी सत्प्रेरणा से विश्व भर में कल्याणकारी सेवाकार्य किए जा रहे है ऐसे निर्दोष हिन्दू संत को 9 सालों से निर्दोषता के सभी सबूत होने के बावजूद एक दिन की भी जमानत या पेरोल नही दी गई। जबकि देशद्रोहियों, नेताओं, अभिनेताओं, आतंकियों व हत्यारों को तत्काल जमानत देकर बरी भी कर दिया गया। यह कैसा कानून है जो दोषियों को बेल और निर्दोष संत को जेल भेज देता है। महिला उत्थान मंडल बैतूल की अध्यक्ष रूपा विश्वकर्मा ने कहा कि पॉस्को एक्ट का दुरुपयोग कर हिन्दू संत श्री आशारामजी बापू को झूठे केस में फंसाया गया है। जिनके खिलाफ कोई भी सबूत नही है। एफआईआर में बलात्कार का कोई जिक्र नही है उसकी मेडिकल रिपोर्ट में भी बापूजी को क्लीन चिट मिली है। उन्होंने बताया कि पूज्य बापू जी को बदनाम करने के लिए ये प्रचार किया गया कि बापू जी का केस बलात्कार का केस है। मगर ये पूरी तरह से झूठ है। उन्होंने कहा कि देश का कोई भी नागरिक आरटीआई डाल कर सरकार से ये जानकारी हासिल कर सकता है कि यह रेप केस नही है तो शिकायतकर्ता लडक़ी की शिकायत में, न पुलिस स्टेटमेंट, न मेडिकल रिपोर्ट में और न ही न्यायालय की तरफ से ये कहा गया है कि रेप किया गया है। इसके बावजूद देश भर में ये ढिंढोरा पीटा गया कि ये रेप का मामला है। गत वर्ष पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था जोधपुर जेल में 1500 कैदियों के बीच रहने के कारण बापूजी कोरोना संक्रमित हो गए थे उपचार के दौरान उनका हीमोग्लोबिन 3.7 रह गया था ऐसी विषम परिस्थिति में भी उन्हें बेल नही दी गई। उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन क्यों किया जा रहा है। रेखा ठाकरे व आशा भूमरकर ने बताया कि उन्ही की प्रेरणा से देश भर में महिला उत्थान मंडल द्वारा महिलाओं के सर्वांगीण विकास हेतु चलें स्व की ओर महिला शिविर का आयोजन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान, तेजस्विनी अभियान, आध्यात्मिक जागरण हेतु युवती एवं महिला संस्कार सभाएं, दिव्य शिशु संस्कार अभियान, नि:शुल्क चिकित्सा सेवा, चल चिकित्सा सेवा, मातृ-पितृ पूजन दिवस, जेलों में कैदी उत्थान कार्यक्रम, घर-घर तुलसी लगाओ अभियान, गौ-संवर्धन व हर अमावस्या पर गरीबों में अन्न, वस्त्र,कम्बल आदि के भंडारे, दीपावली पर दरिद्र नारायण सेवा आदि समाजोत्थान के कार्य किए जाते हैं । प्रेमलता झपाटे व शोभा चंदेल ने कहा कि ये सारे दैवी सेवाकार्य संत श्री आशारामजी बापू की प्रेरणा से ही चलाए जाते हैं तो 57 वर्षों से ऐसे सेवा प्रकल्प चलाने वाले निर्दोष हिन्दू संत की अब तक रिहाई क्यों नही की गई। नारी सुरक्षा व स्वतंत्रता हेतु सरकार द्वारा बनाए सशक्त कानूनों को पुनर्विचार कर संशोधित किया जाए ताकि कोई भी निर्दोष प्रतिष्ठित व्यक्ति इन कानूनों का शिकार न बनें। ज्ञापन सौंपते समय समिति के जिलाध्यक्ष राजेश मदान के साथ महिला उत्थान मंडल बैतूल की रूपा विश्वकर्मा, रेखा ठाकरे, आशा भूमरकर, शोभा चंदेल, रामबाई बामने, पुष्पा प्रजापति, प्रेमलता झपाटे, किरण कवडकर, सुरेंद्र कुंभारे, एलबी गायकवाड़, मनोहर प्रजापति आदि कई साधक साधिकाएं मौजूद थे।
संत और समाज के बीच सुप्रचार की सेवा की सेवा में सहभागी होने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री सपन दुबे जी का आभार।साधुवाद।
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