जोर पकडऩे लगी है संत श्री आशारामजी बापू की शीघ्र रिहाई की मांग

श्री योग वेदांत सेवा समिति ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


बैतूल। श्री योग वेदांत सेवा समिति बैतूल के तत्वावधान में मंगलवार को विश्व प्रसिद्ध संत श्री आशाराम बापू के 85वें अवतरण दिवस पर चलाए जा रहे सेवा कार्य के दौरान राष्ट्रपति के नाम से कलेकटर अमनसिंह बैस को उनकी शीघ्र रिहाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसी तारतम्य में श्री योग वेदांत सेवा समिति बैतूल के जिलाध्यक्ष राजेश मदान ने बताया कि हमारी भारतीय संस्कृति की महानता को पूरे विश्व के मनीषियों ने स्वीकार किया है और इस संस्कृति के आधार स्तम्भ ब्रह्मज्ञानी संत-महापुरुष ही है। धर्म का अभ्युदय करने ऐसे ब्रह्मज्ञानी संतों का ही धरती पर अवतरण होता है। पिछले 55 वर्षों से इन दूरदर्शी महापुरुष ने देश में करोड़ों की संख्या में संयम-सदाचार प्रेरक युवाधन सुरक्षा सत्साहित्य पहुँचाया, देश की जनता को ओजस्वी-तेजस्वी, बहुप्रतिभा-सम्पन्न बनाने हेतु योग व ब्रह्मविद्या का प्रशिक्षण दिया, मानवता, परदु:खकातरता, ईश्वरीय शांति व निर्विकारी सुख की गंगा बहायी, हजारों बाल संस्कार केन्द्रों और युवा सेवा संघों के माध्यम से बाल और युवा पीढ़ी में सच्चरित्रता व नैतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना कर राष्ट्र की रीढ़ मजबूत की, ‘महिला उत्थान मंडल’ की स्थापना की एवं महिलाओं के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न प्रकल्प चलाए, अनगिनत लोगों को ईश्वर-भक्ति व जनसेवा के रास्ते लगाकर आध्यात्मिक क्रांति का उद्घोष किया। इनके मार्गदर्शन से कई सामाजिक व राष्ट्रीय समस्याओं का असरकारक समाधान मिला है। इनके उपदेशों व समाजोत्थान के सेवाकार्यों से विभिन्न मत-पंथ-सम्प्रदायों के देश-विदेश के करोड़ों लोग लाभान्वित हुए हैं। इन्होंने देशवासियों के हृदय में देश व संस्कृति के प्रति निष्ठा सुदृढ़ की है, व नशामुक्ति अभियान चलाकर एवं समाज से कुरीतियां दूर करके आपसी सौहार्द व भाईचारे को बढ़ावा देते हुए स्वस्थ व सुंदर समाज का निर्माण किया है। इन्होंने कर्तव्यपालन, ईमानदारी, मितव्ययिता की बहुमूल्य शिक्षा देकर, पर्यावरण सुरक्षा, आयुर्वेदिक, प्राकृतिक आदि स्वदेशी चिकित्सा-पद्धतियों को बढ़ावा देकर तथा स्वदेशी उत्पादों व गौ संरक्षण-संवर्धन की ओर लोगों को मोडक़र देश के अर्थतंत्र को मजबूती दी है। भारत के जिस ब्रह्मज्ञानी संत ने नि:स्वार्थ भाव से अपना पूरा जीवन विश्व मानवता को ऊंचा उठाने में समर्पित कर दिया। आज उनको ही झूठे आरोप लगाकर कानूनी जटिलताओं एवं त्रुटियों का दुरुपयोग कर जेल में डाल दिया गया है। ऐसे भारतीय संस्कृति के संरक्षक ब्रह्मनिष्ठ पूज्य संत श्रीआशारामजी बापू कारावास में हैं। जब समाज-विघातक कार्य करनेवालों, आतंकवादियों के भी मानवाधिकारों का ख्याल हमारे देश में व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रखा जाता है तो ऐसे महान संत जिन्होंने समाजहित व सत्प्रवृत्तियों में अपना पूरा जीवन लगा दिया उन विभूति के मानवाधिकारों का ख्याल तो अवश्य ही रखा जाना चाहिए। विश्व विख्यात हस्तियों ने भी राष्ट्र निर्माण में पूज्य बापूजी के अमूल्य योगदान की बहुत सराहना की है। उनका जेल में होना समाजहित के कार्यों में एक बड़ी भारी क्षति है। आज पूरा विश्व जिन आपदाओं का सामना कर रहा है उससे विश्वमानव की रक्षा करने का सामर्थ्य ब्रह्मज्ञानी संत श्री आशारामजी बापू में है। इतिहास साक्षी है कि समाज ब्रह्मज्ञानी संत-महापुरुषों की महानता को उनके जीवन काल में समझ नहीं पाता और जब उनका साकार श्रीविग्रह नहीं रहता तब पश्चाताप करता है। पर ऐसे महापुरुषों के सान्निध्य लाभ से वंचित रहने से समाज को हुए गंभीर नुकसान की क्षतिपूर्ति कोई नहीं कर पाता। पूज्य बापूजी के 85 वें अवतरण दिवस 2 मई के अवसर पर ऐसे महान ब्रह्मज्ञानी संत के प्रत्यक्ष सांन्निध्य लाभ से वंचित करोडों हृदयों की वेदना आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।  यह मुद्दा देश के लाखों-करोड़ों नागरिकों के जीवन से, हितों से जुड़ा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में संविधान प्रदत्त अपने विशेषाधिकारों का सदुपयोग कर राष्ट्र हित में ब्रह्मज्ञानी संत श्री आशारामजी बापू की रिहाई के लिए शीघ्रातिशीघ्र उचित कार्यवाही करवाएं। ज्ञापन सौंपते समय जिलाध्यक्ष राजेश मदान के साथ अजय देवकते व मोहन मदान मौजूद थे। 

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