गणगौर वैवाहिक और दाम्पत्य सुख का प्रतीक

गणगौर उत्सव उत्साह पूर्वक संपन्न



बैतूल। राजस्थानी महिलाओं द्वारा 16 दिन तक मनाए जाने वाले गणगौर उत्सव का समापन समाज की महिलाओं द्वारा उत्साह पूर्वक संपन्न हुआ। यह उत्सव श्रीमती तारा माहेश्वरी के निवास पर भग्गुढाना में विगत 50 वर्षो से स्वनिर्मित प्रतिमाओं का पूजन कर उत्सव मनाया जाता है। इस मौके पर तारा माहेश्वरी ने बताया कि गणगौर दोनों के मिलन का जश्न मनाता है जिसे वैवाहिक और दाम्पत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। गणगौर हिंदू कैलेंडर के पहले महीने चैत्र के महीने में मनाया जाता है। यह वसंत, फसल, वैवाहिक निष्ठा, वैवाहिक आशीर्वाद और संतानोत्पत्ति का उत्सव है। गण भगवान शिव का पर्याय है और गौरी या गौर भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती का प्रतीक है। गणगौर इन दोनों के मिलन का उत्सव मनाता है और वैवाहिक सुख का प्रतीक है। इस अवसर पर तारा माहेश्वरी, सत्यभामा माहेश्वरी, नीलू माहेश्वरी, मधु माहेश्वरी, संगीता माहेश्वरी, रेखा माहेश्वरी, अर्चना माहेश्वरी, रमा माहेश्वरी, संगीता माहेश्वरी, रेखा माहेश्वरी, प्रीति माहेश्वरी, राधिका माहेश्वरी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थी। 


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