क्रिएटिव तरीके से शिवानी ने बताए पॉलिथिन और प्लास्टिक के नुकसान


बैतूल। हम पुन: उपयोग की दृष्टि से ऐसी चीजों को इस्तमाल में तो ला लेते हैं जो हमें आसान लगती है,परंतु कई चीजें ऐसी होती है जिन्हें हम छोटा और बेकार जान कर इधर-उधर सडऩे के लिए फेंक देते हैं,और इससे अनभिज्ञ रहते हैं कि वही छोटी चीजें आगे चलकर हमारे लिए कितनी बड़ी हानि का विषय बन सकती है। आरडी पब्लिक स्कूल की कक्षा 10वीं की शिवानी किरोडे ऐसी चीजों को काफी लंबे समय से ऑब्जर्व कर रही है। वह जिस भी शादी फंक्शन में खाने के चमचों को इधर-उधर फेकता देखती, विचार करती कि इसका परिणाम क्या होगा? शिवानी किरोडे ने पांच सौ से अधिक चम्मच को पुन: उपयोग कर सुंदर आर्ट पीस बनाया और अपनी क्रिएटिविटी के माध्यम से भविष्य की चेतावनी दे डाली। शिवानी ने यह आर्ट पीस अपने कलर गुरु एवं युवा चित्रकार श्रेणिक जैन के मार्गदर्शन में एक दिन की मशक्कत के बाद तैयार की है। शिवानी ने यह आर्ट पीस प्लास्टिक की चमचों ड्रायर से मेल्ट करके बनाया है। शिवानी का मानना है की शादी विवाह, बर्थडे पार्टी लगभग सभी फंक्शंस में डिस्पोजेबल चम्मच का उपयोग होना आम बात है। और यह काफी किफायती भी पड़ती है। पर हमने कभी यह नहीं सोचा की यही चम्मच हमारी प्रकृति के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है। शिवानी का कहना है कि पॉलिथीन को बनाया तो जा सकता है और एक बार बन जाने के बाद उसे नष्ट करना आसान नहीं है। सरकार अपने स्तर पर इस समस्या से निपट रही है परन्तु हमें भी अपना योगदान देना चाहिए। सामान्यत: कोई भी पुन: उपयोग के बारे में नहीं सोचता बल्कि प्लास्टिक व मेटल बीनने वाले भी उसे छोटी और अनुपयोगी वस्तु समझकर नहीं उठाते। यही कारण है कि उसका रीसाइकिल नहीं हो पाता और वह भूमि को नुकसान पहुंचाती है। अगर हमने अभी प्लास्टिक की चीजों को नियंत्रण में नहीं किया तो आगे चलकर हमारी पृथ्वी पर बहुत अधिक मात्रा में प्लास्टिक हो जाएगा जिससे भूमि में बंजरता बढ़ेगी व पेड़ पौधों में कमी आएगी। कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ेगा तो गर्मी भी बढ़ेगी, बर्फ पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ जाएगा और आगे चलके हमारी पृथ्वी की भी दुर्दशा हो जाएगी। शिवानी किरोडे ने सभी से निवेदन किया है कि,चम्मच का रीसायकल किया जा सकता है रिसाइकल नहीं होता है तो इसके माध्यम से सजावट के सामान बनाए जा सकते है। शिवानी के इस नवाचार की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।


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